छात्र-छात्राओं के लिए आचरण संहिता
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01.
प्रत्येक छात्र अपना पूरा ध्यान महाविद्यालय की व्यवस्था के अंतर्गत निर्धारित प्रकार से अध्ययन पर लगावें। साथ ही महाविद्यालय द्वारा आयोजित अथवा अनुमोदित पाठ्येत्तर कार्यक्रमों में भी पूरा सहयोग देगा।
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02.
कॉलेज की संपत्ति, भवन, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, आदि की शांति, सुव्यवस्था, सुरक्षा और स्वच्छता में प्रत्येक छात्र रुचि लेगा और उन्हें कायम रखने में और सुधारने में सहयोग देगा। इसके विपरीत किसी भी प्रवृत्ति में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ना तो भाग लेगा और ना दूसरों को उकसायेगा।
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03.
महाविद्यालय द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं में वह पूरी तरह सहयोग देगा और भाग लेगा और बिना प्राचार्य की अनुमति से कक्षा अथवा परीक्षा से अनुपस्थित नहीं रहेगा।
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04.
प्रत्येक छात्र अपने व्यवहार में सहपाठियों और शिक्षकों से नम्रता का व्यवहार करेगा और कभी अश्लील, अपशिष्ट या अशोभनीय व्यवहार नहीं करेगा।
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05.
छात्रों को सरल, निर्व्यसन और मितव्ययी जीवन ही बिताना चाहिए। अतएव विशेषतः कॉलेज की सीमाओं में किसी भी प्रकार के मादक पदार्थ का सेवन सर्वथा वर्ज्य रहेगा। वेशभूषा में भी छात्रों को तड़क-भड़क, विलासिता शोभा नहीं देती, इसका ध्यान रखना होगा।
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06.
छात्रों को यदि कोई कठिनाई हो तो गुरुजन अथवा प्राचार्य के समक्ष निर्धारित प्रणाली से और शांतिपूर्वक ही अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा।
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07.
आंदोलन, हिंसा अथवा आतंक द्वारा किसी भी कठिनाई को हल करने का मार्ग छात्र नहीं अपनायेंगे।
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08.
छात्र सक्रिय दलगत राजनीति में भाग नहीं लेंगे। अपनी समस्याओं के विषय में राजनीतिक दलों, कार्यकर्ताओं अथवा समाचार-पत्रों आदि के माध्यम से हस्तक्षेप या सहायता नहीं माँगेंगे।
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09.
परीक्षाओं में या उनके संबंध में किसी प्रकार से अनुचित लाभ लेने या अनुचित साधनों का प्रयोग करने का प्रयत्न गंभीर दुराचरण माना जायेगा।
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10.
महाविद्यालय की प्रतिष्ठा और कीर्ति जिस प्रकार से बढ़े और उसमें किसी प्रकार का कलंक न लगे, ऐसा ही व्यवहार छात्रों के द्वारा अनुशासन और संयम में रहकर करना चाहिए।
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11.
आचरण के इन साधारण नियमों के भंग होने पर छात्रों को चाहिए कि दोषी व्यक्तियों को उचित दंड देने में सहयोग दें, जिससे महाविद्यालय का प्राथमिक कार्य अध्ययन शांति और मनोयोग के साथ चल सके।
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12.
छात्रों को यह सावधानी रखनी होगी कि किसी अनैतिकतामूलक या अन्य गंभीर अपराध का अभियोग उन पर न लगे परंतु यदि ऐसा हुआ तो उनका नाम तत्काल कॉलेज के छात्रों में से हटा दिया जावेगा और न वे कॉलेज में किसी भी छात्र प्रतिनिधि के पद पर बने रह सकेंगे।
सामान्य नियम
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01.
विद्यार्थी शालीन वेशभूषा में महाविद्यालय में आएगा। किसी भी स्थिति में उसकी वेशभूषा उत्तेजक नहीं होना चाहिए।
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02.
प्रत्येक विद्यार्थी अपना पूर्ण ध्यान अध्ययन में लगायेगा साथ ही महाविद्यालय द्वारा आयोजित पाठ्येत्तर गतिविधियों को भी पूरा सहयोग प्रदान करेगा।
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03.
महाविद्यालय परिसर में वह शालीन व्यवहार करेगा। अभद्र, असंसदीय भाषा का प्रयोग गाली-गलौच, मारपीट या आग्नेय अस्त्रों का प्रयोग नहीं करेगा।
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04.
प्रत्येक विद्यार्थी अपने शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों से नम्रता एवं भद्रता का व्यवहार करेगा।
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05.
महाविद्यालय परिसर को स्वच्छ बनाये रखना प्रत्येक विद्यार्थी का नैतिक कर्तव्य है। वह सरल निव्यर्सन और मितव्ययी जीवन निर्वाह करेगा।
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06.
महाविद्यालय की सीमाओं में किसी भी प्रकार के मादक पदार्थों का सेवन सर्वथा वर्जित रहेगा।
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07.
महविद्यालय में इधर-उधर थूकना, दीवारों को गन्दा करना या गन्दी बातें लिखना सख्त मना है। असामाजिक तथा अपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाये जाने वाले विद्यार्थी पर कठोर कार्यवाही की जायेगी।
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08.
विद्यार्थीगण अपनी मांगो का प्रदर्शन आंदोलन या हिंसा फैलाकर नहीं करेंगे। विद्यार्थी अपने आपको दलगत राजनीति से दूर रखेगा तथा अपनी मांगो को मनवाने के लिये राजनैतिक दलों, कार्यकर्ताओ अथवा समाचार पत्रों का सहारा नहीं लेगा।
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09.
महविद्यालय परिसर में मोबाइल का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
अध्ययन संबंधी नियम
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01.
प्रत्येक विषय में विद्यार्थी की 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी तथा यह एन.एस.एस. में भी लागू होगी। अन्यथा उसे वार्षिक परीक्षा में बैठने की पात्रता नहीं होगी।
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02.
विद्यार्थी प्रयोगशाला में उपकरणों का उपयोग सावधानी पूर्वक करेगा। उनको स्वच्छ रखेगा एवं प्रयोगशाला को साफ-सुथरा रखेगा।
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03.
ग्रंथालय द्वारा स्थापित नियमों का पूर्ण पालन करेगा, उसे निर्धरित संख्या में ही पुस्तकें प्राप्त होगी तथा समय से न लौटाने पर निर्धारित अर्थदण्ड देना होगा।
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04.
अध्ययन से सम्बंधित किसी भी कठिनाई के लिये वह गुरुजनों के समक्ष अथवा प्राचार्य के समक्ष शांतिपूर्वक ढंग से अभ्यावेदन प्रस्तुत करेगा।
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05.
व्याख्यान कक्षों, प्रयोगशालाओं या वाचनालय में पंखे, लाईट, फर्नीचर, इलेक्ट्रिक फिटिंग आदि का तोड़फोड़ करना दण्डात्मक आचरण माना जायेगा।
संस्था छोड़ने हेतु नियम
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01.
स्थानांतरण प्रमाण-पत्र या चरित्र प्रमाण-पत्र प्राप्त करने हेतु आवेदन के साथ निःशेष प्रमाण-पत्र (No Dues Certificate) प्रस्तुत करना होगा।
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02.
स्थानांतरण प्रमाण-पत्र या चरित्र प्रमाण-पत्र प्राप्त करने हेतु आवेदन के साथ महाविद्यालय द्वारा प्रवेश के समय प्रदत्त आई कार्ड की छायाप्रति एवं अंतिम अध्ययन वर्ष की अंकसूची की छायाप्रति संलग्न करनी होगी।
यदि कोई छात्र मध्य सत्र में संस्था त्यागने और दूसरी संस्था में प्रवेश लेने की इच्छा करता है तो उसे विश्वविद्यालय अधिनियमानुसार निम्न कार्यवाही पूरी करनी होगी। नियम
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(अ)
संस्था त्यागने के उद्देश्य की लिखित सूचना देनी होगी।
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(ब).
समस्त शुल्कों को जमा करना होगा।
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(स) उक्त सम्पूर्ण सत्र का पूर्ण शुल्क उसे महाविद्यालय को देना पड़ेगा।
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(द) महाविद्यालय से प्राप्त अन्य सहायता, निःशुल्क शिक्षा या छात्रवृत्ति आदि की राशि लौटानी होगी।
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(च) निःशेष प्रमाण-पत्र (No Dues Certificate) प्रस्तुत करना होगा।
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(छ) स्थानांतरण प्रमाण-पत्र या चरित्र प्रमाण-पत्र की दूसरी प्रति चाहने वाले छात्रों को 10/- रूपये जमा करना होगा।
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(ज) समावधान निधि की वापसी महाविद्यालय छोड़ने पर टी.सी. लेते समय ही होगी बशर्ते अपनी रसीद प्रस्तुत करें। समावधान निधि की वापसी महाविद्यालय छोड़ने के छः माह बाद नहीं की जायेगी।
रैगिंग के ख़िलाफ़ कई नियम हैं. नियम
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रैगिंग करने वाले को दो साल तक की जेल हो सकती है और 10 हज़ार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
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रैगिंग करने वाले को घोर अनुशासनहीनता माना जाएगा.
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रैगिंग की शिकायत करने वाले छात्र को रक्षा दी जाएगी.
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रैगिंग की शिकायत करने वाले छात्र को डरने की ज़रूरत नहीं है.
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रैगिंग करने वाले छात्रों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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रैगिंग करने वाले छात्रों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर भी दर्ज कराई जा सकती है.
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रैगिंग की शिकायत करने के लिए, कॉलेज में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.
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रैगिंग की शिकायत करने के लिए, पुलिस से भी मदद ली जा सकती है.
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रैगिंग की शिकायत करने के लिए, helpline@antiragging.in पर भी ईमेल किया जा सकता है. रैगिंग के ख़िलाफ़ कुछ और ज़रूरी बातें:
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रैगिंग के ख़िलाफ़ शपथ पत्र जमा करना ज़रूरी है.
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रैगिंग से पीडित छात्र को होने वाली क्षति के हिसाब से सज़ा
रैगिंग के कानून नियम
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पिछले दशक में उच्च शिक्षण संस्थानों खासकर इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग के भयावह रूप को देखने के बाद यूजीसी ने रैगिंग के खिलाफ कई कड़े नियम बनाए थे। आइए जानते हैं कि यूजीसी द्वारा रैगिंग की रोकथाम के लिए क्या नियम बनाए गए जो सभी छात्रों और अभिभावकों के लिए जानने जरूरी हैं।
ये व्यवहार रैगिंग माना जाएगा - -
01.
अगर संस्थान या हॉस्टल में किसी स्टूडेंट (छात्र या छात्रा) को उसके रंगरूप या पहनावे के आधार पर टिप्पणी की जाए और उसके स्वाभिमान को आहत किया जाए। उसे अजीबोगरीब नाम लेकर पुकारने और प्रताड़ित करने को भी रैगिंग माना जाएगा।
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02.
किसी स्टूडेंट को उसकी क्षेत्रीयता , भाषा या जाति के आधार पर अपमान जनक नाम लेकर पुकारना और प्रचलित करना भी रैगिंग की श्रेणी में आएगा।
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03.
स्टूडेंट की नस्ल या पारिवारिक अतीत या आर्थिक पृष्ठभूमि को लेकर उसे लज्जित करना और अपमान करना रैगिंग माना जाएगा।
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04.
छात्राओं खासकर नई छात्राओं को अजीबोगरीब नियमों के तहत परेशान करना या अपमान जनक टास्क देना भी रैगिंग माना जाएगा।
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05.
यूजीसी ने स्पष्ट कहा है कि यदि धर्म, जाति या क्षेत्रीयता के आधार पर किसी छात्र को मजाक से भी अपमानजनक लगता है तो उसे रैगिंग की श्रेणी में माना जाएगा।